सभी लोग तैयार हो रहे थे. पति पत्नी माता और 1 बच्चा. असम के गुवाहाटी सेहर के गनेश्गुरी स्थान के विवाह भवन में रिश्तेदार का शादी था. बारिश का मौसम था. पति का मन न था. लेकिन माता और पत्नी के कारण जाना पर रहा था. सभी तैयार हो गए और पति ने एक App से गाड़ी बुक कर दिया. गाड़ी भी 2 मिनट में पहुँच गया. पति आगे बैठ गया बाकि पीछे. काफी समय सभी चुप थे. थोड़ी देर बाद पति ने ड्राईवर से कहा “आज बारिश थोड़ा धीरे धीरे दे रहा है. रास्ते में पानी तो जमा नहीं हुआ होगा?” ड्राईवर ने जवाब दिया “अभी तो जमा नहीं हुआ है लेकिन जोर से दिया तो रास्ता भर जायेगा.”. फिर पति ने कहा “बारिश में गाड़ी चलाना बहुत मुस्किल होता होगा है न?” ड्राईवर ने कहा “हाँ. लेकिन उपाय भी नहीं है. नहीं चलाएंगे तो घर नहीं चलेगा और चलाएंगे तो गाड़ी ख़राब होता है.”
हर
जगह पानी था. कही कम तो कही ज्यादा. ड्राईवर जैसे तैसे आगे बढ़ने लगा. कहीं कहीं
गाड़ी रास्ते से जाता तो कहीं कहीं पानी में तैरकर जाता. कहीं गाड़ी रूक रूककर जाता
तो कहीं तेज भागता. कभी गाड़ी के अन्दर पानी घुसता तो कभी इंजन में पानी घुसता. लेकिन
जैसे तैसे गाड़ी गणेशगुरी पहुँच गया. सभी परेशान हो गए थे. सफ़र तो मुश्किलों भरा
रहा लेकिन समय भी बहुत ज्यादा लग गया. इस 30 मिनट के रास्ते को पार करने में 90
मिनट लग गया. ड्राईवर भी बहुत परेशान था क्यूंकि इस 90 मिनट के रास्ते में गाड़ी ने
बहुत अत्त्याचार सहे और भाड़ा बस थोड़ा ज्यादा होकर 500 हो गया.
पति
को छोड़कर सभी गाड़ी से उतरे. पति पर्स से पैसा निकालने लगा. तभी उसने ड्राईवर को
देखा जो अपने गाड़ी को चारों तरफ से देखकर परेशान हो रहा था. सफ़र के दौरान पति को
मालूम चला था की ड्राईवर जैसे तैसे अपने परिवार को चला रहा है. बच्चों को पढ़ा रहा
है. माँ-पिताजी का इलाज करा रहा है. ड्राईवर की पत्नी घर का ख्याल रख रही है.
ड्राईवर का कमाई तो घर के नाम पर ही खर्स हो जाता है. एसे में अभी गाड़ी का यह
हालत. न जाने servicing में कितना खर्सा लग जाएँ. यह
सोचकर वह गाड़ी से उतरा और अपने परिवार को कहा “तुमलोग भवन के अन्दर जाओ मैं पैसा
देकर आ रहा हूँ.”
परिवार
भवन की तरफ जाने लगे. तभी पति ने ड्राईवर को पैसा देते हुए कहा “भाड़ा तो 500 हुआ
है लेकिन तुम यह 2000 रख लो.” ड्राईवर ने पूछा “क्यूँ?” पति ने कहा, “तुम इस गाड़ी
के सहारे से जैसे तैसे अपने परिवार को चला रहे हो. आज इस बारिश में भी तुम गाड़ी
चलाने निकल आयें. क्योंकि घर बैठोगे तो पैसा नहीं कमा पाओगे और तुम्हे पैसों की
बहुत जरुरत है. अब Servicing के नाम पर ही
तुम्हारा कितना खर्सा हो जाएँ मालूम नहीं. मेरे पास ज्यादा पैसे तो नहीं है
क्यूंकि में भी साधारण आदमी ही हूँ. लेकिन जितना में दे सकता हूँ इतना दे रहा
हूँ.”
यह
सुनकर ड्राईवर ने कहा “आप क्यूँ पैसा ज्यादा दे रहे है. यह तो मेरा problem है. आप
लोगों को जैसे तैसे यहाँ लाना ही मेरा काम है. इसमें मेरे गाड़ी को तकलीफ होने से
भी इसमें आपकी गलती नहीं. मैं जानता था बारिश के मौसम में इसा हो सकता है. लेकिन
उपाय नहीं था. आप 500 से ही दीजिये.”
पति
ने ड्राईवर को पैसा ज्यादा लेने के लिए काफी जोर दिया लेकिन ड्राईवर 500 रुपए लेकर
ही वहां से निकलने लगा. जाते जाते ड्राईवर ने कहा “आप पैसा ज्यादा दे रहे है या
मैं पैसा ज्यादा नहीं रख रहा हूँ. केवल यह जरुरी नहीं. सबसे जरुरी यह है की आपने मेरे
तकलीफ को देखा और न सिर्फ मेरा मदद करने के बारें में सोचा बल्कि करने के लोए भी
आगे आयें. मैंने आपके इंसानियत को देखा और आत्म स्वाभिमान के साथ उसका सन्मान
किया. यह सोच और यह कर्म सबसे जरुरी है. पैसा और हम तो अस्थायी है. आज है कल नहीं
है. लेकिन यह सोच और यह कर्म जब तक है तब तक इंसानियत है, मनुष्यता है. और हमें
इसे जैसे भी जीवित रखना होगा. और एक बात मुझे पैसों की जरुरत है लेकिन मैं अच्छा
पैसा ही कम लेता हूँ और उसे अच्छे से manage भी कर लेता हूँ. पैसा कमाने के
साथ-साथ उसे manage करना सबसे ज्यादा जरुरी है”. यह कहकर वह एक मुस्कुराहट के साथ
चला गया.
यह
देख पति भी मुस्कुराते हुए भवन में गया. वहां उसका पत्नी बच्चा और माँ इंतजार कर
रहा था. वैसे ही जैसे ड्राईवर का माँ-पिताजी, पत्नी और बच्चा घर में उसका इन्तेजार
कर रहा है.
बस
यही थी एक छोटी सी कहानी जो थी आपको सुनानी.
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